वेनिस पानी से घिरा हुआ शहर है, फिर भी इसके भवन सदियों से सुरक्षित हैं—इसका कारण बहुत ही दिलचस्प और वैज्ञानिक है। सबसे पहले यह जानना चाहिए कि वेनिस के भवन पानी पर तैरते नहीं हैं। इन्हें लकड़ी के मजबूत खंभों (जैसे एल्डर, ओक आदि) पर बनाया गया है, जिन्हें दलदली जमीन में गहराई तक गाड़ दिया गया है। इन खंभों के ऊपर पत्थर की मजबूत परत रखकर इमारतें खड़ी की जाती हैं।
अब मुख्य सवाल यह है कि लकड़ी सड़ती क्यों नहीं? इसका कारण यह है कि आमतौर पर लकड़ी को सड़ने के लिए ऑक्सीजन और सूक्ष्म जीव (फंगस, बैक्टीरिया) की जरूरत होती है। लेकिन वेनिस में ये लकड़ी के खंभे हमेशा पानी और कीचड़ के अंदर डूबे रहते हैं, जहाँ ऑक्सीजन बहुत कम होती है। इसलिए सड़न की प्रक्रिया लगभग रुक जाती है। समय के साथ एक और प्रक्रिया होती है—पानी के खनिज पदार्थ (minerals) लकड़ी में प्रवेश कर जाते हैं, जिससे लकड़ी और भी सख्त हो जाती है, लगभग पत्थर जैसी। इसके अलावा, वेनिस की इमारतों में “इस्त्रियन स्टोन” जैसे खास पत्थरों का उपयोग किया जाता है, जो खारे पानी (salt water) से जल्दी खराब नहीं होते। हालाँकि, आज के समय में प्रदूषण, समुद्र का बढ़ता स्तर और नमी (seepage) जैसी समस्याएँ वेनिस की इमारतों को नुकसान पहुँचा रही हैं, इसलिए लगातार मरम्मत जरूरी होती है। इस तरह, वेनिस की इमारतें इसलिए टिकाऊ हैं क्योंकि उन्हें पानी के साथ तालमेल बिठाकर बेहद समझदारी से बनाया गया है।
इतना ही नहीं, इतने बरसों से वेनिस कभी पानी में डूबा भी नहीं! इसका कारण है MOSE (मोसे) प्रोजेक्ट, जिसे अक्सर "मूज" भी कहा जाता है, वेनिस को समुद्र की ऊंची लहरों और बाढ़ (जिसे 'Acqua Alta' कहते हैं) से बचाने के लिए बनाया गया एक विशाल इंजीनियरिंग प्रोजेक्ट है। इसका पूरा नाम 'Modulo Elettromeccanico Sperimentale' (प्रायोगिक इलेक्ट्रोमैकेनिकल मॉड्यूल) है।
इस प्रोजेक्ट का उद्देश्य वेनिस शहर और उसके ऐतिहासिक स्मारकों को एड्रिएटिक सागर (Adriatic Sea) के बढ़ते जलस्तर और विनाशकारी ज्वार (high tides) से सुरक्षित रखना है। यह काम कैसे करता है - इसमें समुद्र के तल पर 78 स्टील के गेट लगाए गए हैं। सामान्य दिनों में ये गेट पानी के नीचे छिपे रहते हैं और रेत से भरे होते हैं। जब बाढ़ का खतरा होता है (लगभग 110-130 सेमी से अधिक ज्वार), तो इनमें हवा भरी जाती है जिससे ये ऊपर उठकर समुद्र के पानी को वेनिस की लैगून में आने से रोक देते हैं। इस सिस्टम का पहला सफल परीक्षण 10 जुलाई 2020 को हुआ था और 3 अक्टूबर 2020 को इसने पहली बार शहर को एक बड़े ज्वार से डूबने से बचाया था। इस पर लगभग 7.3 बिलियन यूरो (करीब 65,000 करोड़ रुपये) खर्च हुए हैं। यह प्रोजेक्ट भ्रष्टाचार के आरोपों और देरी के कारण काफी चर्चा में रहा है। यह तकनीक वेनिस के लिए एक "सुरक्षा कवच" की तरह काम करती है, जिससे सेंट मार्क्स स्क्वायर जैसे निचले इलाके अब सुरक्षित रहते हैं।
कुछ लोग मानते हैं कि ताजमहल का भी निर्माण उसी तरह हुआ था जैसे वेनिस की इमारतों कि। ताजमहल और वेनिस की इमारतों की संरचना को देखने पर यह स्पष्ट होता है कि दोनों के निर्माण में कुछ समान इंजीनियरिंग सिद्धांत जरूर अपनाए गए हैं, लेकिन उनकी तकनीक और संरचनात्मक पद्धति पूरी तरह एक जैसी नहीं है। दोनों ही स्थानों पर सबसे बड़ी चुनौती कमजोर या पानी से प्रभावित जमीन पर भारी इमारतों को टिकाऊ बनाना था। ताजमहल यमुना नदी के किनारे स्थित है, जहाँ मिट्टी में नमी और ढीलापन होता है, जबकि वेनिस पूरी तरह पानी से घिरे लैगून पर बसा शहर है। ऐसे में दोनों जगहों पर मजबूत नींव तैयार करना सबसे महत्वपूर्ण कार्य था।
इंटरनेट पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार, ताजमहल के निर्माण में मुगल वास्तुकारों ने कुओं जैसी गहरी नींव (well foundation) की तकनीक अपनाई, जिसमें जमीन के भीतर कई गहरे कुएँ खोदकर उन्हें पत्थर, चूना और लकड़ी से भरा गया, ताकि पूरी संरचना का भार समान रूप से वितरित हो सके और इमारत धंसने से बची रहे। इसके विपरीत, वेनिस की इमारतों को खड़ा करने के लिए हजारों लकड़ी के खंभों को पानी के नीचे की मिट्टी में गाड़ा गया, जिन पर प्लेटफॉर्म बनाकर इमारतें खड़ी की गईं। ये लकड़ी के खंभे पानी के अंदर ऑक्सीजन की कमी के कारण सड़ते नहीं हैं और समय के साथ और भी मजबूत हो जाते हैं।
हालाँकि दोनों ही निर्माण पद्धतियाँ कमजोर जमीन पर स्थायित्व प्रदान करने के उद्देश्य से विकसित की गई थीं, फिर भी माना जाता है इनमें स्पष्ट अंतर है। ताजमहल ठोस जमीन और नदी के किनारे स्थित एक विशाल संगमरमर की संरचना है, जिसकी नींव गहराई में जाकर स्थिरता प्राप्त करती है, जबकि वेनिस का पूरा शहर ही पानी पर टिका हुआ है और उसकी इमारतें लकड़ी के खंभों के जाल पर आधारित हैं। इस प्रकार निष्कर्षतः कहा जा सकता है कि ताजमहल और वेनिस की संरचनाओं में मूल समस्या समान थी, लेकिन उसे हल करने के लिए अपनाई गई इंजीनियरिंग तकनीकें अलग-अलग थीं, जो अपने-अपने संदर्भ में अत्यंत अद्भुत और प्रभावी साबित हुई हैं।
(इंटरनेट स्रोत)
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